Thursday, February 13, 2025

नव वर्ष

नए समय की ये चाल मुबारक तुम्हें,

नव नूतन ये साल मुबारक तुम्हें। 


है सलामत नहीं इक भी चिड़िया का घर,

ये बीहड़ सा काल मुबारक तुम्हें ।


जल रहा है बदन गंगा जल से यहां

मेरी माता का हाल मुबारक तुम्हें ।


है कोहरा मई में, दिसंबर में बारिश,

प्रकति का कमाल मुबारक तुम्हें ।


श्वास न लो मरो श्वास लो तो मरो,

मृत्यु ऐसी अकाल मुबारक तुम्हें ।


बट गया धर्मो में और हिंसा बढ़ी,

ईश इतना विशाल मुबारक तुम्हें ।


पाखंड कुरीति अंधविश्वास सब,

पिछली सदियों के जाल मुबारक तुम्हें ।


नए बरस में बनोगे क्या इंसान तुम?

सोचना, ये सवाल मुबारक तुम्हें ।


खैर छोड़ो अभी जश्न हो जाने दो,

हो न वर्ष भी हानिकारक तुम्हे ।।





नव वर्ष

नए समय की ये चाल मुबारक तुम्हें, नव नूतन ये साल मुबारक तुम्हें।  है सलामत नहीं इक भी चिड़िया का घर, ये बीहड़ सा काल मुबारक तुम्हें । जल रहा ...